
व्हाइट हाउस ने रविवार को बताया कि अमेरिका और चीन के बीच जिनेवा में दो दिन चली वार्ताओं के बाद व्यापार समझौता हो गया है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने बातचीत को “सार्थक” बताया और कहा कि पूरा विवरण सोमवार को साझा किया जाएगा।
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीयर ने कहा कि दोनों देशों ने तेजी से सहमति बनाई, जिससे यह स्पष्ट होता है कि मतभेद उतने बड़े नहीं थे जितना पहले समझा जा रहा था। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने $1.2 ट्रिलियन के व्यापार घाटे के कारण आपात स्थिति घोषित कर दी थी और टैरिफ लगाए थे। उन्हें भरोसा है कि यह समझौता उस संकट को सुलझाने में मदद करेगा।
अब तक अमेरिका-चीन के बीच 145% तक के टैरिफ लगने से भारत को फायदा हो रहा था, क्योंकि अमेरिकी कंपनियां भारतीय आपूर्तिकर्ताओं से सामान मंगवा रही थीं। कुछ चीनी निर्यातकों ने भारतीय कंपनियों से मदद भी मांगी थी ताकि वे अमेरिकी ऑर्डर पूरा कर सकें।
लेकिन अब यदि इस नए समझौते में टैरिफ घटा दिए जाते हैं, तो चीन अपनी खोई हुई बढ़त फिर से हासिल कर सकता है। इससे भारत के लिए वैश्विक व्यापार में अपनी भूमिका बढ़ाने का मौका कमज़ोर हो सकता है, खासकर जब भारत पश्चिमी देशों के साथ अपने खुद के व्यापार समझौतों पर चर्चा कर रहा है।